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कायापलट

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो उफनती नदी मुझको याद आ गई
        
                                                    
                            
जब झील आई नजर कोई मरती हुई
तेरी अटखेलियां याद आने लगी
दिखी कोई कली जब सिसकती हुई
वो कुलांचे लगाती थी हिरनी कोई
थक के बैठी है शै ये वही तो नहीं
वक्त ने तुझको कितना बदल है दिया
जलना भूलेगा कैसे भी तुझ सा दिया
याद तुझको नहीं अब तेरी खूबियां
तेरी कुव्वत ने कर लीं बहुत दूरियाँ
तू वही है मगर याद खुद को भी कर
खुद से मिल जा अगर फासले दूर कर
रब ने दुनिया बनाई खुशी के लिए
सारा संसार है आदमी के लिए
2 महीने पहले
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Manju Sharma

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