क्या बात है नजरों में उदासी नहीं आई
दिल टूट गया कोई सदा भी नहीं आई
ये सख्तदिली थी या सब्र की थी इम्तिहां
जलवों से उनके कोई बेताबी नहीं आई
आने को आया दिल,मगर हर बार यूं गया
ऐसा नसीब था दिल नवाजी नहीं आई
अफसाना एक ही रहे सुनते तमाम उम्र
हैरत है हमको कभी उबासी नहीं आई
अच्छा हुआ कि हमने इजहार ना किया
ऐसा नहीं गालों पे गुलाबी नहीं आईं
खालिस दिलों की बात, मोहब्बत की बात थी
कोई भी बात इसमें सियासी नहीं आई
वो प्यार भी करते हैं सियासत की तरह से
अपनी समझ में बात जरा भी नहीं आई