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तय कम है,कयास है ज्यादा

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज फिर दिल उदास है ज्यादा
        
                                                    
                            
तेरी कमी का एहसास है ज्यादा
बादलों आज तो खुलकर बरसो
जमीं को शिद्दत की प्यास है ज्यादा
कोई ग़म मुझे बहा ले जाएगा
बेखुदी का बहाव है ज्यादा
कब हो पाऊंगा पाक दामन मैं
हर गुनाह बेहिसाब है ज्यादा
तुझसे मुझको बहुत हैं उम्मीदें
सुना है तू ग़म शनाश है ज्यादा
प्यार मौसमों से,पर एहतियातन
उनके बदन पर लिबास है ज्यादा
कोई मुझको सम्हाल भी लेगा
तय कम है, कयास है ज्यादा
तू जो आए तो अंधेरे जाएं
तेरे मुंह पर उजास है ज्यादा
उतरके बदन से रूह में आया
रोग ये खतरनाक है ज्यादा
नींद टूटी है अब मुसाफिर की
खो गया क्या, तलाश है ज्यादा
16 घंटे पहले
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