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तय कम है,कयास है ज्यादा

                
                                                         
                            आज फिर दिल उदास है ज्यादा
                                                                 
                            
तेरी कमी का एहसास है ज्यादा
बादलों आज तो खुलकर बरसो
जमीं को शिद्दत की प्यास है ज्यादा
कोई ग़म मुझे बहा ले जाएगा
बेखुदी का बहाव है ज्यादा
कब हो पाऊंगा पाक दामन मैं
हर गुनाह बेहिसाब है ज्यादा
तुझसे मुझको बहुत हैं उम्मीदें
सुना है तू ग़म शनाश है ज्यादा
प्यार मौसमों से,पर एहतियातन
उनके बदन पर लिबास है ज्यादा
कोई मुझको सम्हाल भी लेगा
तय कम है, कयास है ज्यादा
तू जो आए तो अंधेरे जाएं
तेरे मुंह पर उजास है ज्यादा
उतरके बदन से रूह में आया
रोग ये खतरनाक है ज्यादा
नींद टूटी है अब मुसाफिर की
खो गया क्या, तलाश है ज्यादा
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14 घंटे पहले

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