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शायद मेरे लिए रुका होगा

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब्त जज्बातों पर रखना होगा
        
                                                    
                            
बहकते कदम परखना होगा
कोई नई कहानी न बन जाए
हर जलते लम्हे पर रुकना होगा
आपसे जहीन सोच बैठे हैं
हम न होंगे तो जहां का क्या होगा
वो है निहायत जरूरी मेरे लिए
शायद मेरे लिए रुका होगा
ये आग अगर बुझ भी जाए कहीं
देर तक समा धुआं धुआं होगा
बाद उनके वतन फरोशी का
खत्म शायद ये सिलसिला होगा
ये समा समाता ही नहीं आंखों में
कैसे कुदरत ने इसे बुना होगा
जो मिला हमें छूट जाएगा कभी
होगा हासिल वो तजुर्बा होगा
अब के जो हम गए इस शहर से
फिर न शायद कभी आना होगा
2 महीने पहले
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