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बच्चों की खुशी समझ

Anil Meena

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मनुष्य हमेशा से मानता आया है, कि जब हम बच्चे थे, तब ना- समझ थे, लेकिन बच्चे और बड़े आदमी में कितना अंतर होता है,
        
                                                    
                            
अंतर विषय:- सोच समझ में आदमी बच्चों की तरह रहता तो, कितना अच्छा होता,
आदमी बच्चों की तरह खुशी मनाता तो कितना अच्छा होता, जैसे:- बच्चे असली रूपयों से दुकान से नकली नोटों को पाकर,
कितना खुश होता है,
जबकि आदमी असली नोटों से भी खुश नहीं होता।
- अनिल मीणा
 
2 घंटे पहले
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