विज्ञापन

मेरा सपना

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरा सपना जो है,उसको सच के दिखलाऊँगा।
        
                                                    
                            
पहले तो हर्गिज नहीं,सपने को बतलाऊँगा।।
मेहनत करूँगा,खूब पढ़ूँगा कृपा रामजी कर देंगे।
एक दिवस फिर मैं भी निश्चित,विजय पताका फहराऊँगा।।

मुझे पता है अथक परिश्रम,मन मारे करना होगा।
व्यसनों से हो दूर,ज्ञान का सागर निज भरना होगा।।
दुनिया से दुख-दर्द मिलेंगे,लेकिन आगे बढ़ना है।
आग का दरिया अथक परिश्रम, से मैं पार हो जाऊँगा।।

अमन-चैन की फुलवारी में, फूल खिलेंगे खुशियों के।
काबिल बन कर मैं भी निश्चित,पीर हरूँगा दुखियों के।।
पापकर्म छूने न पाए,संत जनों को परसूँगा।
तजूँगा हर अभिमान हृदय से, निर्मल हृदय बनाऊँगा।।

काया कुटी पुरानी होगी,एक दिवस ढह जाएगी।
लोंगो के मन कुछ दिन अच्छी,करनी ही रह जाएगी।।
आज नहीं तो निश्चित ही कल,करनी का फल मिलना है।
सेवाभाव सदा ही अपने,उर अंतस बैठाऊँगा।।
-पंडित अनिल
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile