विज्ञापन

खान-पान

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भोजन केवल स्वाद नहीं,
        
                                                    
                            
है जीवन का आधार,
सात्त्विक भोजन तन-मन रखता,
नित स्वस्थ और साकार।

माँ के हाथों की रोटी में,
बसता स्नेह महान,
दाल, चटनी, साग-सब्ज़ियाँ,
भर देतीं मुस्कान।

ऋतु के फल और ताज़ी सब्ज़ी,
प्रकृति का वरदान,
जितना सादा भोजन होगा,
उतना स्वस्थ इंसान।

अन्न मिला तो श्रम को मानें,
किसान का सम्मान,
दाने-दाने में श्रम बसता,
दाना नहीं बेईमान।

तेल-मसाले सीमित रखना,
मीठा भी हो कम,
संतुलित भोजन अपनाएँ तो,
खुशियाँ आएँ हरदम।

जल भी जीवन का आधार है,
रखिए इसका ध्यान,
स्वच्छ जल और स्वच्छ भोजन,
स्वस्थ रखे इंसान।

मिल-बाँटकर जब भोजन हो,
बढ़ता प्रेम अपार,
एक थाली में मिल जाते हैं,
छोटे-बड़े परिवार।

भोजन की हम कद्र करें तो,
बचे अन्न का मान,
थाली में उतना ही लें,जो ,
हो नहीं नुकसान।

खान-पान में संयम रखकर,
जीवन हो आसान,
तन स्वस्थ हो,मन प्रसन्न हो—
यही सुखद है खान-पान।

-पंडित अनिल
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Yunush khan

8144 कविताएं

View Profile

Mamta Tiwari

650 कविताएं

View Profile