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छुपा के रक्खूँ

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            *तुम मेरी जान*
        
                                                    
                            

तुमको सीने से लगा के रक्खूँ
कोई देखे न छुपा के रक्खूँ।

तुम इबादत हो मेरी तुम ज़न्नत
दिल के मंदिर में सजा के रक्खूँ।

तुम मेरी जान मेरी महबूबा
तुम पे साँसें ये लुटा के रक्खूँ।

तुम हो नाज़ुक बदन कली नाज़ुक
आओ पलकों पे बिठा के रक्खूँ।

कोई तुमको बला न छूए अनिल
बोल होठों पे दुआ के रक्खूँ।

 
3 महीने पहले
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