विज्ञापन

सबकी डफली राग सबका है यहाँ बिल्कुल अलग

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भगवान को
        
                                                    
                            

भूख खा जाती है जब अक्सर ख़रे ईमान को
कोसने लगता है फिर तो आदमी भगवान को।

हम हैं छोटे जब हो जी इज़्ज़त उछाला कीजिए
फर्क आखिर क्या ही पड़ता है यहाँ धनवान को।

आज़माते सब्र हैं सरकार इतना किस लिए
सब्र भी है तोड़ता इक दिन बड़े इंसान को।

सबकी डफली राग सबका है यहाँ बिल्कुल अलग
बात आती है समझ इतनी तो हर नादान को।

आस सरकारों से आखिर क्या लगाएँ हम अनिल
कब तलक नारों से सींचेगी ये रेगिस्तान को।
- पंडित अनिल
16 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dr fouzia

6957 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13466 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7504 कविताएं

View Profile