विज्ञापन

उफ ये भयंकर गर्मी

Anil Bharadwaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तप रहे धरती गगन उफ ये भयंकर गर्मी,
        
                                                    
                            
उगल रही है आग उफ ये भयंकर गर्मी।

इसके जुल्मो सितम से बिजली ही बचाती है,
एसी फ्रिज कूलरों से ठंडकें बरसाती है,
रौब बिजली ने अगर झाड़ा गर्मी मैडम पर,
वो उसके ट्रांसफार्मर ही फूंक जाती है।

नहाने देता नहीं टंकी का उबला पानी,
फिर सताती है जमके उफ ये भयंकर गर्मी।

ब्यूटी पार्लर से सज के नौतपा में आती है,
फिर तो ये गरमा-गरम हीरोइन सी लगती हैं।
गर्मियों की लगे मिस इंडिया मिस वर्ल्ड कभी,
मलिका-ए-तपन ग्रीष्म सुंंदरी सी लगती है।

आ रही लू की बिकनी पहने छुपा लो चेहरे,
कनपटी सेक देगी उफ ये भयंकर गर्मी।
- अनिल भारद्वाज 
5 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile