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सावन की ठंडी फुहार

Anil Bharadwaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सावन की ठंडी फुहार को याद हमारी आती होगी।
        
                                                    
                            

चुनरी के रंगीलेपन को,
घूंघट के शर्मीलेपन को,
जुल्फों के घुंघरालेपन को,
याद हमारी आती होगी।

गालों को चूमती लटों को याद हमारी आती होगी।

पलकों के कजरारेपन को,
अंखियों के मतवारेपन को,
चंद्र बदन के गोरेपन को,
याद हमारी आती होगी।

कंधों से गिरते पल्लू को याद हमारी आती
होगी।

रोज जागती इन रातों को,
उन रेशमी मुलाकातों को,
रिमझिम रिमझिम बरसातों को,
याद हमारी आती होगी।

प्यारी बिंदिया की झिलमिल को याद हमारीआती होगी।

मन में चुभते खालीपन को
धक धक करती हर धड़कन को
मीठी मीठी सी तड़पन को,
याद हमारी आती होगी।

हर इक चूड़ी की खन-खन को याद हमारी आती होगी।

 
3 महीने पहले
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