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सावन का ये मौसम है

Anil Bharadwaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ब्रज छोड़कर मत जइयो
        
                                                    
                            
सावन का यह मौसम है।

पनियां भरन को आऊंगी पनघट में सांवरे
सखियों के संग न छेड़ना मुझको बावरे।
गगरी मोहे ऊंचइयों जरा हौले से उठइयो,
कंकर ना मार जइयो
सावन का ये मौसम है।

मैं जानती हूं यमुना तीर काहे तू आएं
हम गोपियों के मन को कान्हा काहे चुराये।
जा लौट के घर जइयो माखन चुरा के खाइयो,
पर चीर ना चुरइयो
सावन का ये मौसम है।

मेघों की कसम तुझको बडदलियों की कसम है,
झूलों की कसम तुझको पटुलियों की कसम है।
बरसाने में तू अइयो झूला मोहे झुलइयो,
फिर बांसुरी बजइयो
सावन का ये मौसम है।

बारिश के बहारों में अपने भीगी में बदन,
झुक जाएंगे फिर लाज से कजरारे ये नयन।
घूंघट मेरा उठाइयो पर नजर ना लगइयो,
मोहि हाथ ना लगाइयो
सावन का ये मौसम है।

गोकुल की कसम तुझको वृंदावन की कसम है,
बृज धाम की कसम मधुबन की कसम है।
जब नंदगांव अइयो निधिवन में रात रहियो
फिर रास तू रचइयो
सावन का ये मौसम है।

कर-कर के तेरी याद कुंज गलियां रो रहीं,
छम छम जो बजतीं पांवों की पैजनियां रो रहीं।
मत बावरी बनाइयो
मोहि और ना रुलइयो
इक बार तो मिल जइयो
सावन का ये मौसम है।

बचपन जवानी कान्हा तेरे संग चली गई,
नैनो की ज्योति तुझको ढ़ूंढ़ने चली गई।
अबकी बरस जो अइयो
सारी उमर न जइयो
कांथा मोहे लगइयो
सावन का ये मौसम है।
- अनिल भारद्वाज 
2 महीने पहले
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