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कब क्या हो जाए

Anil Bharadwaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोई नहीं जानता है जग में
        
                                                    
                            
कब किसको क्या हो जाए।

कब जीवन बसंत हो जाए,
कब पतझड़ सा झड़ जाए।

कब खुशियों की बारिश हो,
कब गम की धूप निकल आए।

कब तक पंछी उड़े गगन में
कब माटी में मिल जाए।

आज मिला था जो हंस हंसकर,
कल सदैव को खो जाए।

जो सबको बुलवाते हैं कब
उन्हें बुलावा आ जाए।

कब तक देह रहे चंदन सी,
कब चंदन संग जल जाए।

कर्म करो ऐसे कि हर सदी
सदां तुम्हारे गुण गाए।
- अनिल भारद्वाज 
3 महीने पहले
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