विज्ञापन

देशभक्ति का ढोल पीटते

Anand gurjar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बड़े-बड़े नेता देखे हैं
        
                                                    
                            
सुने बहुत उनके भी भाषण,
पर उनमें वह शक्ति नहीं है
जो कर ले पागल की होड़ ।

देशभक्ति का ढोल पीटते
और विकास की बीन बजाते,
पर विचलित होते हैं मग से
नहीं लग पाता है जब जोड़ ।

नेता जिस दिन शोर मचाते
पागल से ज्यादा चिल्लाते,
हार मगर जाते हैं फिर भी
हो जाता जब भंडाफोड़ ।

प्यारे तुम पागल हो जाओ
ना पागलपन का ढोंग रचाओ,
नहीं बचोगे नाटक करके
पड़ेंगे कोड़े नहीं तो कोढ़ ।
- आनन्द गुर्जर सहोदर
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Adv DK Kanojiya

71 कविताएं

View Profile