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अंधेरों - अंधेरों से लड़ कर रौशनी भी थकी

Anamika singer

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब न ख्वाहिशें बची
        
                                                    
                            
अंधेरों --- अंधेरों से लड़ कर रौशनी भी थकी
किसको अपना कहें , सारी दुनियां ही
अनजानी से है लगी
छोड़ दी उम्मीदें सारी
खोने के लिए बस बाकी है
वो झूठी हसरतें जो
नाजों से थी पाली
दो पल की हंसी से ज़िंदगी ,
नहीं है गुजारी जाती
तोड़ो जो पत्थरों को अगर
टूट के रेत बन ही जाता है
झूठ -- झूठ सा ख्वाब
कब तलक , सहेज के कोई
अंखियों में है रख पाता है
आईना की बिसात अब इतनी
कहां की वो सच दिखा सकें
आखिर कौन व्यथित मन का
मौन समझे , ऐसा अपना
नज़रों को इस जहां में नज़र
नहीं आता है
अब न ख्वाहिशें बची
अंधेरों -- अंधेरों से लड़ कर रौशनी भी थकी !!
7 महीने पहले
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