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दुनिया का नया शक्ति संतुलन

अनिल कुमार

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वस्तु की कीमत कैसे बनती एक वर्मा रहे बताय,
        
                                                    
                            
मांग पूर्ति करते निर्धारित किसी वस्तु की कीमत भाय।
यह सिद्धांत पुराना हो गया जब से मोनोपोली आय,
अब तो चाबी कीमत की वे टैरिफ से है रहे बनाय।
दुनिया के कुछ हिस्से ऐसे बच्चे हुए कुपोषित जाय,
उसी अनाज को देश दूसरे सवरों को हैं रहे खिलाय,
सभ्य समाज का दावा करते अंदर गरल हिलोरे खाय,
तेल के खेल में वेनेजुएला खुद ही अपराधी बन जाय,
ऐसा नंगा नाच दिखाया सम्प्रभुता का दम घुट जाय,
ऐसी लूट मची दुनिया में यूएनओ खुद में शरमाय।
बनी नीतियां सबकी ऐसी सारे देश रहे पछताय,
जो जिसके पाले में बैठा उसको रहे सही बतलाय,
गुट बंदी की ऐसी माया निर्गुट देश रहे पछताय,
तानाशाही चरम पे पहुंची जंगल राज पड़े दिखलाय,
और तबाही आने वाली तुमको सत्य रहे बतलाय,
विश्व युद्ध अब हो नहीं सकता बिगड़ा शक्ति संतुलन जाय,
ऐसे देश बढ़ेगी दिक्कत जिनसे कुछ बनता है नाय,
गाजा में क्या हाल हुआ है दुनिया ने क्या देखा नाय,
इजराइल को सही बताता है यू एस ए मन में पछताय,
5 साल से जंग चल रही यूक्रेन बना खंडहर जाय,
कौन रोकने वाला इनको सबके हाथ लाल दिखलाय,
तीजा अंदर करें तयारी चोला साफ दिखाता जाय,
ऊपर से हमदर्द बना है कर्ज के जाल में रहा फंसाय,
त्रिगुट से बचने की क्षमता किसी एक में नहीं दिखाय,
गलत को गलत बताने की भी हिम्मत बची किसी में नाय,
अगर है रहना इस दुनिया में ताकत खुद की लेव बढ़ाय,
पांच साल का चक्कर छोड़ो लम्बी नीति बनाओ भाय,
कर्ज़ मर्ज़ का चक्कर छोड़ो खुद का फंड बनाया जाय,
भारी भरकम फंड लगाओ फ्यूचर प्लान का मैप बनाय,
पेन किलर खाने से भैया मिटता दर्द किसी का नाय,
जो था मैसेज मुझको देना तुम तक बात दई पहुंचाय।
एक घंटा पहले
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