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और फिर एक कविता लिखता हूँ |

Amogh Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अलसाई शामें, जागती रातें,
        
                                                    
                            
बीतते लम्हे, टूटते ख्वाब,
टूटकर बिखरता मैं,
बिखर कर सिमट ता हूँ,
और फिर एक कविता लिखता हूँ |
एक महीने पहले
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