रिश्तों की इक झूठी होड़ तन्हा सच का सन्नाटा
शोहरत का इक झूठा शोर रुस्वा सच का सन्नाटा
मौत का मातम महशर तक ज़िन्दा सच का सन्नाटा
जब चुप हो गए सब आखर बोला सच का सन्नाटा
हो गए सब शफ्फाक सफेद काला सच का सन्नाटा
रख दिए सब अल्फ़ाज़ कुरेद पाला सच का सन्नाटा
कहना सुनना मन का रोग अच्छा सच का सन्नाटा
झूठी दुनिया ओछे लोग सच्चा सच का सन्नाटा
सुख़न की अनहद मंज़िल है माना सच का सन्नाटा
‘अंजुम’ कितना मुश्किल है पाना सच का सन्नाटा