ख़ामोशी में भी तेरा नाम सुनाई देता है,
दिल को हर दर्द में आराम सुनाई देता है।
तू नहीं है तो भी लगता है यहीं बैठा है,
तेरा एहसास मुझे शाम सुनाई देता है।
जिसको खोने का कभी डर भी नहीं था दिल को,
आज हर पल वही इल्ज़ाम सुनाई देता है।
हमने रिश्तों को निभाया है दुआओं की तरह,
तुझमें अब भी वही अंजाम सुनाई देता है।
तेरी तस्वीर से बातें तो नहीं करता मैं,
फिर भी आँखों को तेरा पैग़ाम सुनाई देता है।
इश्क़ शायद कोई मंज़िल नहीं, सफ़र है अमित,
जिसमें हर मोड़ पे उसका नाम सुनाई देता है।
-अमित पाण्डेय