विज्ञापन

ख़ामोशी का हमसफ़र

Amit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़ामोशी का हमसफ़र
        
                                                    
                            

कुछ ख़ामोश लम्हे
सिर्फ़ ख़ामोश नहीं होते,
वे दिल की तहों में उतरकर
उम्र भर की रौशनी छोड़ जाते हैं।

उनकी ख़ामोशी
जो कह जाती है,
उसे बयान करने की
ताक़त लफ़्ज़ों में कहाँ होती है।

कुछ एहसास
आवाज़ के मोहताज नहीं होते,
वे रूह से निकलते हैं
और रूह तक पहुँचकर
इंसान को बदल देते हैं।

सफ़र में मिलने वाला
हर अजनबी,
अजनबी नहीं रहता।
कुछ चेहरे
एक ही मुलाक़ात में
दुआ बन जाते हैं,
और कुछ लोग
बिना किसी रिश्ते के भी
दिल के सबसे क़रीब बस जाते हैं।

फिर उनकी मुस्कुराहट,
उनकी बातें,
और उनकी ख़ामोशियाँ—
यादों का ऐसा कारवाँ बन जाती हैं
जो वक़्त की हर गर्द से गुज़रकर भी
कभी बिखरता नहीं।

ज़िंदगी
अपनी रफ़्तार से चलती रहती है,
रास्ते बदलते हैं,
मंज़िलें बदलती हैं,
लोग बिछड़ जाते हैं—
मगर कुछ मुलाक़ातें
तक़दीर की इबारत बन जाती हैं,
जिन्हें वक़्त भी मिटा नहीं पाता।

कभी-कभी
रब हमारी ज़िंदगी में
कुछ ऐसे मुसाफ़िर भेजता है
जो ठहरते बहुत कम हैं,
मगर सिखा जाते हैं
कि मोहब्बत सिर्फ़
पा लेने का नाम नहीं,
बल्कि किसी की रूह में
एक उजली याद बनकर
बस जाने का हुनर भी है।

तब समझ आता है
हर बिछड़ना
खो जाना नहीं होता;
कुछ फ़ासले
इंसान को उसकी अपनी
गहराइयों से मिला देते हैं।

जो लोग
दिल में उजाला छोड़ जाते हैं,
वे कभी दूर नहीं जाते।
वे हमारी दुआओँ में,
हमारी मुस्कानों में,
हमारे सब्र में,
और हमारे हौसलों में
हमेशा ज़िंदा रहते हैं।

इसलिए
हर मुलाक़ात को
नेमत समझकर जीना,
हर रिश्ते को
एहतराम से निभाना,
और हर जुदाई को
शिकायत नहीं,
एक ख़ूबसूरत तालीम समझकर
अपने सफ़र का हिस्सा बना लेना।

क्योंकि...

हर रिश्ता
लफ़्ज़ों से नहीं लिखा जाता,
कुछ रिश्ते
एहसासों की स्याही से
रूह के सफ़्हों पर उतरते हैं।

और हर कहानी
ज़ुबाँ पर नहीं आती,
कुछ कहानियाँ
ख़ामोशी में जन्म लेती हैं,
यक़ीन में पलती हैं,
उम्मीद से सँवरती हैं,
और इंसान को
उसकी सबसे बेहतर शक्ल से
मिलवा जाती हैं।

आख़िर में बस इतना ही—

अगर आपकी मौजूदगी से
किसी एक दिल को भी सुकून मिले,
किसी एक रूह को भी
उम्मीद की एक किरण नज़र आए,
तो समझ लीजिए...

आपका सफ़र
बेकार नहीं गया।
-आचार्य अमित
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Shivam Awasthi

3 कविताएं

View Profile