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इश्क़ का अग्निपथ

Amit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लड़खड़ाए क़दमों से
        
                                                    
                            
कोई भी दूरी तय करना आसान नहीं होता,
हर मुसाफ़िर को यहाँ
मंज़िल का वरदान नहीं होता।

इश्क़ की राहों में जब
अग्नि का दरिया आता है,
हर कोई चाहकर भी
उस पार नहीं जाता है।

जो दर्द को भी प्रेम समझे,
जो आँसुओं में विश्वास रखे,
जो टूटकर भी प्रभु के चरणों में
अपना हर अहंकार रखे।

वही इस कठिन सफ़र में
सच्चा मुसाफ़िर कहलाता है,
आग के दरिया को भी
प्रेम से पार कर जाता है।

क्योंकि इश्क़ केवल चाहत नहीं,
यह आत्मा का समर्पण है;
जहाँ स्वयं मिट जाता है इंसान,
वहीं प्रेम का वास्तविक दर्शन है।
-आचार्य अमित
2 महीने पहले
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