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दास्तां

Amit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
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मोहब्बत आपके अंदाज़ से
रुसवा अब नहीं हो पाएगी,
खामोशियों में भी आपकी
एक दास्ताँ मुस्कुराएगी।

वक़्त चाहे जितने इम्तिहाँ ले,
हम हौसला नहीं हारेंगे,
टूटकर भी अपने ख़्वाबों को
दिल में ज़िंदा रखेंगे।

कभी तो दिन बदलेंगे,
कभी तो रात ढलेगी,
आज जो किस्मत हमें आज़मा रही है,
कल वही हमारे हक़ में बदलेगी।

हमने दर्द को अपना हुनर बनाया है,
आँसुओं से उम्मीद सजाई है,
गिरकर हर बार उठे हैं हम—
यही तो हमारी असली कमाई है।

मोहब्बत बदनाम नहीं होगी,
वफ़ा बेकार नहीं जाएगी,
जिस राह पर दिल सच्चा हो,
मंज़िल एक दिन खुद चलकर आएगी।

आचार्य अमित
2 महीने पहले
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