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जाने कैसे लोग मिले हैं

Amit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आफ़तें
        
                                                    
                            

किसी को मिल रही है
मुबारकबाद,
किसी को मिल रही हैं
लानतें।

कोई समेट रहा है
स्वयं को,
कोई पाल रहा है
अलामतें।

कोई गुनहगार है,
कोई गुनाह करने को
आतुर।

कोई बाट जोह रहा है,
देख रहा है
रास्ते।

सर में सौदा
कोई न रखे,
रखे दिल में
ग़म
और हाथ में बम।

जाने कैसे लोग मिले हैं,
जो संभाल रहे हैं
आफ़तें...
-आचार्य अमित
एक घंटा पहले
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Sanjai kumar

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