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सलाखें लगाओ, पहरे बिठाओ, बाँधो जंजीरें

Aman Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सलाखें लगाओ, पहरे बिठाओ, बाँधो जंजीरें,
        
                                                    
                            
पर हवाओं का चलना कैसे रोकोगे?
मौसम का बदलना कैसे रोकोगे?

छुपाओगे सच, भर दोगे फ़िज़ा में नफ़रत, पर
नफ़रत का मोहब्बत में बदलना कैसे रोकोगे?

हवाओं का चलना कैसे रोकोगे?
मौसम का बदलना कैसे रोकोगे?
एक महीने पहले
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