आज न जाने कितने दिनों बाद ये सवाल आया है,
गुज़रते वक़्त को देखकर ये ख़याल आया है।
ऐ दोस्त,
एक रोज़ बिछड़ जाएँगे हम सब,
न जाने किधर जाएँगे हम सब।
एक-दूसरे को याद बहुत आएँगे हम सब,
शायद याद करके थोड़ा तो मुस्कुराएँगे हम सब।
एक रोज़ बिछड़ जाएँगे हम सब,
एक-दूसरे को याद बहुत आएँगे हम सब।
जब कभी ग़म में डूब जाएँगे हम सब,
एक-दूसरे को फ़ोन मिलाएँगे हम सब।
एक रोज़ बिछड़ जाएँगे हम सब,
एक-दूसरे को याद बहुत आएँगे हम सब।
अपनी ये कहानियाँ
अपने हमसफ़र को सुनाएँगे हम सब,
एक-दूसरे को याद करके
कोई गीत गुनगुनाएँगे हम सब।
एक रोज़ बिछड़ जाएँगे हम सब,
अपनी नादानियों की कहानी
अपने बच्चों को सुनाएँगे हम सब।
एक रोज़ बिछड़ जाएँगे हम सब,
एक-दूसरे को याद बहुत आएँगे हम सब।