प्रभायुक्त तन, चंद्रवदनिया,
तेरी सूरत स्वर्ण किरणिया।
नयनों में जब प्रेम झलकता,
मन मेरा तो मोहन बनता।
ओस भी तुझसे जल जाती है,
तू हँसे तो भोर मुस्काती है।
तेरी पायल की मधुर तान,
लुटा दे रागों का वरदान।
काजल से गहराए राते,
तेरे स्पर्श से दिन निखराते।
तेरे चूमे हुए गुलाबों से,
ज्यादा भीनी तेरी बातें हैं।
चूड़ी की खनखन मीठी सी,
लगती जैसे वीणा की सी।
जब तू सजे प्रभा की भाँति,
हर अंग में शोभा हो प्राचीन।
तेरे गेसुओं में छाया सावन,
तेरे पास ही मेरा जीवन।