विज्ञापन

कारवां खुद का

Aman singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चल पड़ा हूँ राह अपनी, भीड़ से कुछ दूर हूँ।
        
                                                    
                            
मंज़िलें आवाज़ देतीं, पर मैं खुद में भरपूर हूँ।

न कोई साथ चलने वाला, न कोई राह तकता है।
ये सफ़र मेरा है केवल, जो भी हूँ, बस सच्चा है।

नक़्शे और रास्तों से, अब कोई न वास्ता है।
दिल की सुनी है जबसे, मंज़िल का भी पता है।

ठोकरे खाई कई बार, पर रुका न कारवां।
ज़ख़्म से सीखा चलना, यही है मेरी दास्तां।

तूफ़ानों से बातें की, और सन्नाटों से गीत।
हर मोड़ पर खुद को पाया, यही रहा है मीत।

लोग कहें क्या फर्क पड़ता, जब आत्मा से मुलाक़ात हो।
भीतर की लौ से उजाला, फिर किसे बाहरी बात हो।

सिर्फ़ सपनों के भरोसे नहीं, इरादों का है आसमां।
क़दम मेरे, मेरे अपने हैं, और खुद ही है कारवां।
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

MURLI music

60 कविताएं

View Profile

samarth dalela

4 कविताएं

View Profile