चंदा मामा आए नभ में, मुस्काए ठंडी छांव लिए।
चुपके-चुपके झाँक रहे हैं, तारे सब संग थाम लिए।
गोल-मटोल सा मुखड़ा उनका, जैसे रबड़ी की परात।
बच्चे हँसते झूम उठें जब, देखें उनको रातों रात।
बूढ़े पेड़ की शाख पे बैठें, चंदा गाते मीठे गीत।
नींद कहानी बनकर आए, भर दे सपनों में संगीत।
दादी बोलीं — “वो कृषक है, तारों का खेत वो जोते,”।
“दूर गगन से देख रहा है, हर घर की उम्मीदें बोटे।”
चंदा बोले — “डर मत बेटा, अंधियारे भी बीतेंगे,”।
“सपनों को तू सच कर देना, कल तारे भी जीतेंगे।”
ममता की वो मिसाल बना है, नभ का प्यारा दीपक है।
हर बालक के मन का साथी, सच्चा, मीठा, छोटा लायक है।