आभा तिलक माथे पर, शोभित जैसे चाँद,
तेजस्विता की रेख से, जग पाता आनंद।
श्रद्धा के दीपक जले, मन में ज्योति प्रखर,
भक्ति-भाव से दीप्त हो, अंतर्मन का स्वर।
हर रेखा में मान है, हर बिंदु में विश्वास,
संस्कृति की छाप है, जग में भारत-प्रकाश।
आभा तिलक माथे पर, देता नित संदेश,
धर्म, वीरता, प्रेम का, अमर रहे परिवेश॥
-अमन केशरी सिंह