आज बारिस आयी तुम याद आये,
हम भी घूम -घूम कर खूब नहाए।
मौसम भीगा-भीगा ख्वाहिशें भी नम,
रास्तों में बहुत कीचड़ हर तरफ पानी का दम।
ये कलियां, फूल ,रिमझिम छटाएं, सब मुस्कराएं,
पर हमें सिर्फ तुम ही याद आये।
कभी गए थे साथ तुम्हारे ,
जहां उत्सुकता भरे रास्तों में कीचड़ न था कम।
कभी गिरे कभी गिराए कभी हम तुमपर ,
कभी तुम हम पर थे आये।
लोग देखे हंसे मुस्काये ,
ये बर्बाद घराने है लोग ये भी सुनाए ,
लेकिन हमें सिर्फ तुम ही याद आये।
वो दिन याद है जब तुम छतपर थे आये
तुम्हे देखने के लिए हम सड़कों पर खूब नहाए,
दोस्तों से लड़ाई ,झगड़े किये खूब चिल्लाए
तब जाकर तुम मेरी तरफ देखकर थे मुस्कराए।
आज बारिस में सिर्फ तुम याद आये
वो बचपन के दिन जब हम साथ थे नहाए,
पानी वाले जहाज खूब मिलकर थे दौड़ाए
इसी बीच कभी तुम रूठे कभी हम मनाए
ताकि मेरी मोहब्बत को किसी की नजर न लग जाये
आज बारिस में सिर्फ तुम याद आए....।
alok yadav
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