ऐसे लफ्ज़ कहा से लाऊ जो माँ की ममता को बता सके।
मेरी इतनी औकात कहा जो माँ की ममता को नाप सके।
मै करूं जतन चाहे जितना माँ का कर्ज चुका नही सकता , क्या होती है माँ मैं लफ्ज़ों में बता नही सकता।
खुद भूखी रहती है लेकिन हमको रोज खिलाती है यही तो माँ की ममता है जो कभी ना आँकी जाती है।
मै रोता हूं तो दिल माँ का भी रो उठता है, मेरे हंसने भरसे ही माँ का हर दिन बनता है।
बाकी के जो रिश्ते हैं , वो हर बात पर नाप तोल करे , एक माँ ही है जो निश्वार्थ भाव से अपने बच्चों से प्रेम करे।
माँ के इन उपकारों को कभी अदा कर ही नहीं सकता ।
क्या होती है माँ मैं शब्दों में बता नही सकता।