आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

माँ की ममता

                
                                                         
                            ऐसे लफ्ज़ कहा से लाऊ जो माँ की ममता को बता सके।
                                                                 
                            
मेरी इतनी औकात कहा जो माँ की ममता को नाप सके।
मै करूं जतन चाहे जितना माँ का कर्ज चुका नही सकता , क्या होती है माँ मैं लफ्ज़ों में बता नही सकता।
खुद भूखी रहती है लेकिन हमको रोज खिलाती है यही तो माँ की ममता है जो कभी ना आँकी जाती है।
मै रोता हूं तो दिल माँ का भी रो उठता है, मेरे हंसने भरसे ही माँ का हर दिन बनता है।
बाकी के जो रिश्ते हैं , वो हर बात पर नाप तोल करे , एक माँ ही है जो निश्वार्थ भाव से अपने बच्चों से प्रेम करे।
माँ के इन उपकारों को कभी अदा कर ही नहीं सकता ।
क्या होती है माँ मैं शब्दों में बता नही सकता।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर