विज्ञापन

रंग बिरंगी तितलियाँ

Alok kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये रंग बिरंगी तितलियां जो बसंत आने पर आ जाती है।
        
                                                    
                            
पतझड़ के मौसम में ये कहां अपनी शक्लें दिखाती हैं।
इनको तो भाती है पुष्पो की सुंदर शकलें और जवानी।
सिर्फ तभी लिखती हैं ये अपनी प्रेम कहानी।
मुरझाती शकलो पर ये कहाँ मंडराती है।
ढलती हुई शामों में ये कहा प्रेम गीत गाती है।
ये रंग बिरंगी तितलियां जो बसंत आने पर आ जाती हैं।
पतझड़ के मौसम में ये कहां अपनी शक्लें दिखाती हैं।
सच ! ये रंग बिरंगी तितलियां जो बसंत आने पर आ जाती है।
पतझड़ के मौसम में ये कहां अपनी शक्लें दिखाती हैं।

-राजलक्ष्मी राज
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all