आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

रंग बिरंगी तितलियाँ

                
                                                         
                            ये रंग बिरंगी तितलियां जो बसंत आने पर आ जाती है।
                                                                 
                            
पतझड़ के मौसम में ये कहां अपनी शक्लें दिखाती हैं।
इनको तो भाती है पुष्पो की सुंदर शकलें और जवानी।
सिर्फ तभी लिखती हैं ये अपनी प्रेम कहानी।
मुरझाती शकलो पर ये कहाँ मंडराती है।
ढलती हुई शामों में ये कहा प्रेम गीत गाती है।
ये रंग बिरंगी तितलियां जो बसंत आने पर आ जाती हैं।
पतझड़ के मौसम में ये कहां अपनी शक्लें दिखाती हैं।
सच ! ये रंग बिरंगी तितलियां जो बसंत आने पर आ जाती है।
पतझड़ के मौसम में ये कहां अपनी शक्लें दिखाती हैं।

-राजलक्ष्मी राज
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
48 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर