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उड़ जा पंछी अनंत पथ पर

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उड़ जा पंछी अनंत पथ पर,
        
                                                    
                            
छोड़ दे अपना नीड़।
ऐसे उड़िये उड़ते जाओ,
स्वयं बना लो अपना नीड़।।

चमको ऐसे विश्व पटल पर,
जैसे चमकें चांद सितारा।
अडिग रहो अपने पथ पर,
जैसे रहता है ध्रुव तारा।।

कितने भी आयें झंझावात,
अडिग रहो शिला बन कर।
मातृ भूमि का मान सदा उर में,
बढ़ जाओ अग्र दूत बन कर।।

- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
 
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