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पीपल की पतलइयाँ

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं चाहूँ बन जाऊँ,
        
                                                    
                            
पीपल की पतलइयाँ।
आकर कुछ काल ठहरें,
श्रमित पथिक मोरी छइयाँ।।

पवन से विनती मेरी,
तू चल धीरे धीरे।
पथिक को आये झपकी,
जब आये मेरी छइयाँ।।

 - अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
4 वर्ष पहले
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