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पहले ठुमुक करौ नर्तन ( भजन )

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब तक अधरन पर वंशी,
        
                                                    
                            
कान्हा करहि न कोई बात।
कैसे होय विलग अधरन से,
कैसे हो कान्हा से बात।।

व्याकुल हो गई गोपी जब,
अवसर पाइ छिपाई वंशी।
कान्हा दौड़े दौड़े ढूँढ़ै,
कहाँ गई है मेरी वंशी।।


हर गोपी से पूँछ रहे हैं ,
कहुँ देखी है मेरी वंशी।
हंस बोली वृषभानु कुमारी,
' लाल ' तुम्हारी क्या यह वंशी।।

मचल गये हैं कान्हा तब,
दे दे मेरी प्यारी वंशी।
पहले ठुमुक करौ नर्तन ,
तब दैहौं तेरी वंशी।।

 Asharfi Lal Mishra,
Akbarpur, Kanpur
 
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