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नीति के दोहे मुक्तक

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कंचन कामिनि कीर्ति की, जिसमें इच्छा होय।
        
                                                    
                            
भले ही वेश साधु का,फिर भी साधु न होय।।

--अशर्फी लाल मिश्र,अकबरपुर,कानपुर।
 
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4 वर्ष पहले
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