विज्ञापन

नीति के दोहे (मुक्तक)

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मित्र
        
                                                    
                            
परछाईं संकट काल, धीरज देता होय।
स्वार्थ रहित हो भावना ,मीत जानिये सोय।।

सुख

वशीभूत न लालच के ,निन्दा से हो दूर।
ताहि जीवन सदा सुखी ,खुशियों से भरपूर।।

- अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

samarth dalela

2 कविताएं

View Profile