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नीति के दोहे (मुक्तक)

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            राज्य हित में कांटे भी, बन जाते है फूल
        
                                                    
                            
अरावलीय पहाड़ियां ,राणा के अनुकूल।

केहरि छोड़े न सुभाव , कितना बूढा होय
हिंसा उसके मूल में ,कभी न सात्विक होय।

अशर्फी लाल मिश्र
अकबरपुर,कानपुर

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6 वर्ष पहले
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