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भार्गव राम खण्डकाव्य - 43

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रचा स्वयंबर था सीता का,
        
                                                    
                            
मिथिला राजा जनक ने।
देश देश में खबर फैल गईं,
है भव्य स्वयंबर मिथिला में।।

देश देश के राजा पहुँचे,
देव पहुँच गये मनुष वेश।
ऋषि विश्वामित्र गये वहाँ,
साथ राम लक्ष्मण वीर वेश।।

मंच पर शोभित था पिनाक,
जयमाल शोभित सिया हाथ।
जो वीर पिनाक तीर संधान,
गले जयमाल सिया के हाथ।।

थे बैठे राजा सभा अनेक,
देखें लली अरु देखें पिनाक।
मन में सब थे अति लालायित,
हम करेंगे तीर संधान पिनाक।।

बारी बारी से सब राजा आये,
तिल भर उठा सके न पिनाक।
रुंधे गले से अब कह रहे जनक,
वीर हीन भू हिला नहीं पिनाक।
-अशर्फी लाल मिश्र
2 महीने पहले
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