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भार्गव राम खण्डकाव्य - - 36

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करुण क्रन्दन कर रही पद्मिनी,
        
                                                    
                            
पौत्र जयध्वज के मर जाने पर।
पूत पोते सभी छोड़ चले आज,
बलात ऋषि कामधेनु लाने पर।।

मातु जयध्वज की मनोरमा,
थी बिलख बिलख कर रो रही।
देव पति की एक महा भूल से,
आज महिषमती नगरी रो रही।।

अब चंद्रवंशी याहियावंश में,
केवल अवलायें हि अबलायें।
थीं लाशों पर लाशें पटी हुई,
निज निज पूत खोजें अबलायें।।

महिष्मति की अब गलियाँ,
शोणित धारा से थीं पूरित।
अरु धारा तैरें अब रुण्ड मुंड,
थी कठिन पहचान रुण्ड मुंड।।

ललनाओं को राम ने छुआ नहीं,
अधिकार कर लिया था राज्य पर।
गर्भ में बालक पल रहे, उन्हें छोड़.
शेष थे रुधिर डूबे भूमि पर।।
-अशर्फी लाल मिश्र
3 महीने पहले
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