याचक खड़ा बजार में, मांगे सबसे भीख।
हर कोई मुंह फेरै, नाहीं देता भीख।।
ऐ भिखारी तू सुन ले, जा उस दाता पास।
जिसकी झोली है भरी, न याचक हो निरास।।
मीडिया खड़े पुकारे, चाहे लेव खरीद।
धनवानों के दास हम, नेता हुए मुरीद।।
विषधर नाहि त्यागै विष, भले हि दूध नहाय।
जोगी तोड़ै दन्त जब, नाग हाथ में आय।।
-Asharfi Lal Mishra
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