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आदमी किस तरह का जानवर हो रहा है

Akhileshwar Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आदमी   किस  तरह   का  जानवर  हो  रहा  है
        
                                                    
                            
जानवर की श्रेणी  का हीं  है उजागर कर रहा है
जानवरों  सा  आजकल  व्यवहार  करने लगा है
रिश्ते नाते मानवता को कैसे शर्मशार कर रहा है

कोई  अपने  मां  बाप  को घर से निकाल रहा है
कोई अपने घर की बहुओं को जिंदा जला रहा है
इन  हैवानों  के कारनामों का कितना जिक्र करूं
कई  नाबालिग  बच्चियों से दुर्व्यवहार कर रहा है

नफरत  की  आग  में  खुद जल रहा है इस कदर 
जंगल की आज की तरह समाज को जला रहा है 
जाति और मजहब के कहानियों को झूठा गढ़कर
फिजाओं  में  घृणा  का  वातावरण  फैला  रहा है 

खुद  के  मजहब  व जाति को ऊंचा दिखा रहा है
आजकल अपनी रोटियों को लाशों पर सेंक रहाहै
फौज खड़ी हो गई है जाहिल अदीबो की मुल्क में
कमजर्फ ऐसे  हीं  रोटियों  का इंतजाम कर रहा है

दरिंदों की शक्ल में जाहिल अदीब सब घूम रहा है
हैजा प्लेग कोरोना जैसी बीमारियों को फैला रहाहै
मुल्क  का  समझौता  करने  में ईमान नहीं कांपता
ये सब  आजकल  गिद्धों जैसा व्यवहार कर रहा है

विश्वविद्यालयों  न्यायालयों में नुमाइंदगी कर रहा है
चौथे  खंभा वाला हकीकत कुछ दिखा कुछ रहा है
स्वार्थ  में  डूबकर  सियासी भी जानवर  बन रहा है
बेशर्म  हैं दिल में कुछ अखबारों में कुछ कह रहा है
- अखिलेश्वर तिवारी
2 महीने पहले
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