कॉलेज के वो दिन
आज भी याद आता है
वो पहला दिन कॉलेज का
पापा ने कहकर ये भेजा
सवाल है तेरी डिग्री और नॉलेज का
डिग्री का तो पता नहीं
नॉलेज मिल गया प्यार का लेसन तो मैं पढ़ा नहीं
जी पढ़ा नुस्खा इज़हार का
उस आगे ब्रेंच के कोने में
मेरा ध्यान जा टिक गया नज़रे थी कमज़ोर मेरी थोड़ी
पर कलर रबर बैंड का दिख गया
उसकी काली जुल्फों में जो
रबर बैंड वह नीला था
सच पूछो तो प्यार था यह
नहीं करैक्टर अपना ढीला था
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