आज महफ़िल में उनसे हुआ सामना,बात दिल में जो थी वो निकलने लगी।
हमने सोचा नहीं उसने समझा नहीं,
हमने सोचा नहीं उसने समझा नहीं, ये जुवां इस कदर ही फिसलने लगी।
आज महफ़िल में उनसे हुआ सामना,बात दिल में जो थी वो निकलने लगी।
आज महफ़िल में उनसे हुआ सामना।
उनको देखे हुए था ज़माना हुआ, फिर वफ़ा का यहां ये फसाना हुआ।
ऐसे महफ़िल में उनसे नज़र मिल गई,दिल में चाहत भरी एक कली खिल गई।
दिल में चाहत भरी एक कली खिल गई।
सूनी थीं राहें दिल की यहां दूर तक,उनपे बन कर समां वो भी जलने लगी,
आज महफ़िल में उनसे हुआ सामना, बात दिल में जो थी वो निकलने लगी।
आज महफ़िल में उनसे हुआ सामना।
ना ख़बर थी उसे ऐसे मिल जायेंगे, फूल अपनी वफ़ा के यूं खिल जायेंगे।
उसने देखा मुझे वो भी शर्मा गई, उसके चेहरे पे ऐसे हंसी छा गई।
उसके चेहरे पे ऐसे हंसी छा गई,
मैं खड़ा था जहां वो खड़ी हो गई,और मिलने को हमसे मचलने लगी,
आज महफ़िल में उनसे हुआ सामना, बात दिल में जो थी वो निकलने लगी।
आज महफ़िल में उनसे हुआ सामना।
क्या कहूं मैं यहां इस मुलाकात में, सब्र तो खो गया बात ही बात में।
याद हमको नहीं हमने क्या कह दिया,जो न कहना था वो भी यहां कह दिया।
जो न कहना था वो भी यहां कह दिया,
मिल गया कोई तोहफ़ा हमको यहां, और किस्मत मेरी फिर बदलने लगी,
आज महफ़िल में उनसे हुआ सामना, बात दिल में जो थी वो निकलने लगी।
आज महफ़िल में उनसे हुआ सामना।
उनपे भी है असर अब मेरे प्यार का, छा गया है नशा मेरे दीदार का।
बे-वशी इस तरह उनपे छाने लगी, घूमकर पास मेरे वो आने लगी।
घूमकर पास मेरे वो आने लगी,
तन्हा थी जो कभी इश्क में दिलरुबा,दिल की बातों में ऐसे संवरने लगी,
आज महफ़िल में उनसे हुआ सामना, बात दिल में जो थी वो निकलने लगी।
हमने सोचा नहीं उसने समझा नहीं,
हमने सोचा नहीं उसने समझा नहीं, ये जुवां इस कदर ही फिसलने लगी।
आज महफ़िल में उनसे हुआ सामना
- अखिलेश शुक्ला शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश
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