मंगल-कलश सजे आँगन में, बरसे सुख की धार,
प्रेम-सुमन से महके जीवन, हो मंगल अपार।
सात फेरे, सातों वचन बनें, जीवन का आधार,
अटूट रहे यह प्रेम-सूत्र, जन्म-जन्म का प्यार।
धूप मिले या छाँव घिरे, आए सुख या पीड़ा,
एक-दूजे का हाथ थामकर जीतो जीवन-क्रीड़ा।
विश्वासों के दीप जलें, अनुराग बने श्रृंगार,
त्याग, समर्पण, स्नेह से महके जीवन-संसार।
मधुर हँसी से गूँजे आँगन, पुलकित हो परिवार,
नई पीढ़ियाँ यश से लिखें उज्ज्वल स्वर्ण-विहार।
ज्ञान, विनय, सद्गुण से जीवन पाए नव विस्तार,
कीर्ति-पताका लहराए फिर अम्बर के उस पार।
मात-पिता का पुण्य आशीष बने अटल आधार,
उनकी छाया में खिल उठे जीवन का हर द्वार।
बंधु-बांधव, मित्र, स्नेही रहें सदा संग-साथ,
प्रेम-सुधा से सींचें मिलकर जीवन की हर राह।
पीहर-ससुराल एक होकर प्रेम-सुमन बरसाएँ,
दो कुल मिलकर स्नेह-दीप से नव इतिहास रचाएँ।
कुलदेवी की कृपा अमिट हो, रहे वरद-कर साथ,
हर संकट से रक्षा करके करें सदा कल्याण।
माँ लक्ष्मी का नित्य निवास हो, श्रीहरि का हो नाम,
शिव-पार्वती की असीम कृपा से सिद्ध हों सब काम।
सरस्वती का ज्ञान मिले, गणपति हरें विघ्नभार,
धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष से भर जाए जीवन-द्वार।
आरोग्य, यश, वैभव, कीर्ति से महके हर परिवार,
हर वर्षगाँठ नव-वसंत बन आए बारंबार।
प्रेम-वटवृक्ष सदा फलता-फूलता रहे महान,
सौ-सौ वर्षों तक गूँज उठे शुभ दाम्पत्य-गान।
ईश्वर से बस यही विनय—रहे अधरों पर मुस्कान,
अमर रहे यह प्रेम-बंधन, बने जग की पहचान।
शत-शत मंगलकामनाएँ, शत-शत बार प्रणाम,
सुख, समृद्धि, प्रेम, शांति से ऊँचा हो कुल-नाम।