विज्ञापन

क्या बात होती

Akash Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या बात होती
        
                                                    
                            

वो मेरे ज़हन में रोज आता है
क्या ये इश्क़ में काफ़ी नहीं

मैं भीड़ में ऐसे गुम हो जाता हूं
अपने आप से दूर हो जाता हूं

कभी खुद को खोज लूंगा मै
क्या कहूंगा कहा था मैं

लोग भी क्या है मिलना तो जानते है
मगर बिछड़ने का सबब नहीं मालूम

बात नहीं करते उनसे बात ये है
बात करते तो क्या बात होती
- ऐ. के. गौतम
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

S. L.

41 कविताएं

View Profile