वो किसी और का होके हमे जलाते है
समझो पानी डालकर आग लगाते है
किरायों के मकानों में रौशनी आंख तक पहुंचती
ये और बात उसके ख्याल मुझे जगाते है
जो उसके साथ जिंदगी गुजरी एक तरफ़
अब जो उसके बग़ैर कटनी है वो एक तरफ़
लोग क्या से क्या हो जाते है इश्क़ में
अब हम भी उन्हें ग़ैर होके दिखाते हैं
ये इश्कबाजी हमको ले डूबी है
वो किसी और में भी हमको ही ढूंढते है
- ऐ के गौतम